आत्मिक संदेश

परमेश्वर के तीर
 

परिचय :- भजन संहिता 127 में दाऊद मसीही परिवार की बात करता है। वह कहता है कि यदि घर को यहोवा न बनाए तो उसके बनाने वालों का परिश्रम व्यर्थ होगा। जीवन में जो कुछ हम करते हैं वह यदि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार न हो, परमेश्वर की आशीष उस पर न हो तो हमारा परिश्रम व्यर्थ होता है। इसीलिए दाऊद यहां पर लिखता है कि यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे तो रखवाले का जागना व्यर्थ होगा। इस सन्दर्भ में आगे लिखा है कि यहोवा के पीछे चलने वाले जो लोग हैं, जो उसके डरवैय्ये हैं, यहोवा के दूत उनकी रक्षा करते हैं। इसके बाद लिखा है कि तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते हो, दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिए व्यर्थ ही है क्योंकि वह अपने प्रियो को यूं ही नींद प्रदान करता है। उसके बाद लड़कों की बात आती है और दाऊद कहता है कि जो बच्चे परमेश्वर ने हमें परिवार में दिए हैं, ये उसकी आशीष हैं, उसका वरदान हैं। आगे लिखा हुआ है कि वे वैसे हैं जैसे कि वीर के हाथ में तीर होते हैं। जो बात मैं कहना चाहता हूं, वह परिवार से भी जुड़ी हुई है; बच्चों से भी जुड़ी हुई है और माता-पिता से भी जुड़ी हुई है। परमेश्वर ने हमको जो बच्चे दिए हैं वे उसकी आशीष हैं और वे वैसे हैं जैसे वीर के हाथ में तीर होता है। बाइबिल में लगभग 60 स्थानों पर परमेश्वर के तीरों का वर्णन आया है।
यशायाह 5:26-30 में परमेश्वर के लोगों का वर्णन है, परमेश्वर की सेना का वर्णन है। उसके अपने लोगों का वर्णन है जो कभी थकते नहीं हैं और एक सेना के समान निरन्तर आगे बढ़ते हैं, बड़ी आवाज के साथ। उनके तीर बहुत पैने हैं, बहुत चोखे हैं और उनका निशाना सधा हुआ है। 
जकर्याह 9:14 में लिखा है – “यहोवा का तीर बिजली की नाईं छूटेगा।” बिजली की रफ्तार बहुत तेज़ होती है और जकर्याह लिखता है कि यहोवा का तीर बिजली की नाईं छूटेगा। अय्यूब 6:4 में लिखा है – “क्योंकि सर्वशक्तिमान के तीर मेरे अन्दर चुभे हैं।” अय्यूब कहता है कि परमेश्वर के तीरों से मैं घायल हूं, परमेश्वर ने मुझ पर तीर चलाए हैं। भजन संहिता 38:2 में दाऊद कहता है – “क्योंकि तेरे तीर मुझ में लगे हैं।” 
2 राजा 13:14-17 में वर्णन है कि जब एलीशा मरने पर था तब अपनी मृत्यु से पहले वह राजा योआश को बुलाता है और उससे कहता है कि पूर्व की ओर जो खिड़की लगी है उसे खोल और यहां से तीर चला। यह जो तीर होगा, यह छुटकारे का तीर होगा। यह इस बात का चिन्ह होगा कि परमेश्वर हमको छुटकारा देता है और उसके द्वारा हमको उद्धार मिलता है। यह छुटकारे का चिन्ह होगा। परमेश्वर हम में से हर एक को अपने जलते हुए तीर बनाना चाहता है। परमेश्वर चाहता है कि उसके जो लोग हों वे तीर के समान हों और वे जलते हुए तीर हों। वचन में लिखा है कि परमेश्वर अपने तीरों को अग्निबाण बनाता है, जिसमें धार भी होती है और प्रकाश भी होता है। तीर के सम्बन्ध में हम उन 6 बातों को देखें जिनसे हमारे जीवन में शिक्षा मिलती है। 

1. तीर को अगर निशाने पर लगना है तो उसे तेज़ होना चाहिए :- तीर को अगर निशाने पर लगना है तो पहली बात जो है वह यह कि तीर की धार तेज़ होना चाहिए। अगर तीर में धार नहीं है तो वह कभी अपने निशाने पर लगेगा नहीं।

भजन संहिता 45:5 में परमेश्वर के तीरों के बारे में लिखा हुआ है – “तेरे तीर तो तेज़ हैं, तेरे सामने देश देश के लोग गिरेंगे; राजा के शत्रुओं के ह्रदय उन से छिदेंगे।” इसीलिए सभोपदेशक 4:12 में लिखा हुआ है – “जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती।” जो तीसरा धागा है, जो सबसे प्रमुख धागा है वह है परमेश्वर। हमारा अपने मित्र से जो सम्बन्ध है क्या परमेश्वर उसमें है? क्या उस संगति में परमेश्वर तीसरा धागा है? पति-पत्नी का जो सम्बन्ध है वह मात्र दो लोगों का नहीं है, क्या उसमें तीसरा धागा है? क्या उसमें परमेश्वर है? दो भाईयों का जो सम्बन्ध है वह सिर्फ़ दो लोगों का नहीं है, क्या उसमें तीसरा धागा है? क्या उस सम्बन्ध में परमेश्वर है? क्योंकि जो डोरी तीन तागे से बटी हो, वह जल्दी नहीं टूटती। यदि आप अपने मसीही जीवन में, अपने आत्मिक जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आप ऐसे लोगों के साथ संगति रखिए जो मसीही विश्वास में, जो आत्मिकता में मज़बूत हैं। ऐसे लोग जिनसे आप कुछ पा सकते हैं, जो आपको सही रास्ते पर ले जाने में आपकी मदद कर सकते हैं। मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं - क्या आपके पास कोई ऐसा व्यक्ति है जिसके पास आप आत्मिक मार्गदर्शन के लिए जा सकते हैं? क्या आप के पास कोई ऐसा व्यक्ति है कि जब आप के जीवन में कोई समस्या हो, या आप के परिवार में कोई समस्या हो, तो आप जाकर उसे अपनी समस्या बता सकें? क्या आप के पास कोई ऐसा व्यक्ति है जो आपको परमेश्वर के वचन के अनुसार सही दिशा निर्देश दे सकता है? यदि ऐसा नहीं है तो अभी भी समय है, ऐसा व्यक्ति ढूंढ़ लीजिए। नहीं तो, आपके मसीही जीवन में वह पैनापन नहीं आ पाएगा और हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। तीर के सम्बन्ध में पहली बात जो हमें देखनी है वह यह कि अगर तीर को निशाने पर लगना है तो उसमें यह धार होना चाहिए। उसमें यह पैनापन होना चाहिए; जो संभव है प्रार्थना के द्वारा, परमेश्वर से संगति के द्वारा, उसके वचन के अध्ययन के द्वारा। कितने परिवार हैं जिनमें वचन का अध्ययन किया जाता है? कितने परिवार हैं जिनमें साथ बैठकर प्रार्थना होती है? कितने परिवार हैं जिनमें फैमिली डिवोशन होता है? यह बहुत ज़रूरी है कि हम अपने बच्चों के जीवन को धारदार बनाएं। परमेश्वर ने ये तीर हमें दिए हैं, ये बच्चे हमें दिए हैं, परिवार दिया है, जीवन दिया है और इसका लेखा हमको एक दिन देना है। 

2. यदि तीर को निशाने पर लगना है तो उसे सीधा होना चाहिए :- यदि तीर सीधा नहीं होगा, आड़ा-टेढ़ा होगा तो सही दिशा में नहीं जाएगा। यह बहुत ज़रूरी बात है कि हम जो मसीही लोग हैं, हम जो मसीही जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं; हमारा जीवन बहुत सीधा हो। हमारा परमेश्वर से सम्बन्ध बड़ा सीधा हो। क्या हमारे दिन भर में चौबीस घंटे में से कुछ मिनिट का समय ऐसा होता है जब हम खामोशी से परमेश्वर की निकटता में जाकर, अपना समय बिताते हैं। यह बात हमको अपने आपसे पूछना है। यदि तीर को निशाने पर लगना है तो उसको बड़ा सीधा होना चाहिए। अब प्रश्न यह उठता है कि किस बात में सीधा?

याकूब 5:12 में लिखा है - “तुम्हारी बातचीत हां की हां, और नहीं की नहीं हो, कि तुम दण्ड के योग्य न ठहरो”। क्योंकि यदि तुम अभी हां करोगे और फिर न बोलोगे यानि कहोगे कुछ और करोगे कुछ, तो तुम्हारी कथनी और करनी में अन्तर होगा और तुम दण्ड के योग्य ठहरोगे। इसीलिए तुम्हारी बात हां की हां और न की न हो।

नीतिवचन 24:26 में लिखा है - “जो सीधा उत्तर देता है, वह होठों को चूमता है।” कभी-कभी सीधा उत्तर सुनने की हमारी आदत नहीं होती, हमको मीठा उत्तर सुनना पसन्द होता है। इस कारण यदि हम कोई बात कहते भी हैं तो बड़ा घुमा-फिराकर परन्तु जो सही उत्तर देता है कभी वह कड़वा भी लगता है मगर जो सीधा उत्तर देता है, जो सच बात कह देता है वह मानो होठों को चूमता है।

मत्ती 12:36-37 में प्रभु यीशु मसीह कहते हैं - “मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निदोंष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा।” जो शब्द हम अपने मुख से निकालते हैं, हमारा उद्धार और अनन्त जीवन उन पर निर्भर करता है। प्रभु यीशु मसीह स्वयं कहते हैं - “तू अपनी बातों ही के कारण दोषी और अपनी ही बातों के कारण निदोंष ठहराया जाएगा।” किसी ने सांप के विषय में कहा है कि सांप होता तो सीधा है पर जीवन भर आड़ा-तिरछा चलता है और जब वह मर जाता है, तब सीधा हो जाता है। हमारे साथ भी अक्सर ऐसा ही होता है कि इस संसार में रहते हुए हम आड़े-तिरछे चलना चाहते हैं। सीधी-सीधी बात सुनना हमें कठिन होता है और कई बार सीधी-सीधी बात करना भी हमारे लिए कठिन होता है। अक्सर मां-बाप अपने बच्चों से कहते हैं कि बेटा झूठ नहीं बोलना चाहिए। परन्तु होता यह है कि कभी हमारे घर कोई आता है, बच्चा हमें आकर बताता है कि फलां अंकल आए हैं तो हम कह देते हैं कि बेटा कह दो कि पापा घर पर नहीं हैं। बच्चे इन बातों को देखते हैं, ये बातें तो छोटी-छोटी हैं परन्तु बच्चों के जीवन पर इसका घातक असर होता है और वे देखते हैं कि हमारे जीवन में दोहरापन है।

1 कुरिन्थियों 10:21 में लिखा है - “तुम प्रभु के कटोरे, और दुष्टात्माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते! तुम प्रभु की मेज़ और दुष्टात्माओं की मेज़ दोनों के साझी नहीं हो सकते।” यह सम्भव नहीं है कि हम दोनों तरफ जाएं, कि हम दोनों रास्तों पर चलें। यह भी सम्भव नहीं है कि हम बीच के रास्तों पर चलें, समझौते का रास्ता अपना लें। यदि तीर को निशाने पर लगना है तो दूसरी बात जो हमें देखना है वह यह कि तीर को सीधा होना चाहिए। 

3. तीर का एक उददेश्य होता है :- अपने जीवन में यह बात हम कभी-कभी समझ नहीं पाते कि हमारा उददेश्य क्या है? हमारी मंज़िल क्या है? हमारा पड़ाव क्या है? कभी-कभी हम सोचते हैं कि अगर हम डॉक्टर बन जाएंगे तो हमारे जीवन का उददेश्य पूरा हो जाएगा। परन्तु नहीं, यह जीवन का उददेश्य नहीं है, यह जीवन की मंज़िल नहीं है। यह जीवन का एक पड़ाव तो हो सकता है परन्तु हमारा जो अन्तिम उददेश्य है वह प्रभु यीशु मसीह है, उसके द्वारा दिया गया अनन्त जीवन है। जीवन का यह एक पड़ाव तो हो सकता है कि हम किसी अच्छी नौकरी में चले गए, डॉक्टर बन गए, इन्जीनियर, पासबान या शिक्षक बन गए। यह हमारी मंज़िल नहीं है। ये तो ज़िंदगी के पड़ाव हैं परन्तु हमारी जो मंज़िल है वह तो प्रभु यीशु मसीह की निकटता में है। हमारे जीवन का जो उददेश्य है वह केवल एक है कि हमें परमेश्वर के रास्ते पर चलना है। पौलुस बूढ़ा और कमज़ोर था और रोमी सम्राट ने सीखचों के पीछे उसे क़ैद कर दिया। उस जेल में जहां पर पौलुस के हाथों और पैरों में बेड़ियां पड़ी हुई हैं, वह पौलुस जो कि बूढ़ा है, जो मृत्यु के निकट है, वही पौलुस उस जेल से फिलिप्पियों की कलीसिया के नाम पत्र लिखता है। यदि आप फिलिप्पियों की पत्री पढ़ें तो आपको लगेगा नहीं कि यह सब एक ऐसे व्यक्ति ने लिखा जो बूढ़ा और कमज़ोर था और जेल में बन्द था।

अपनी इस पत्री में पौलुस लिखता है - “मैं सब कुछ कर सकता हूं।” और उससे भी प्रभावशाली एक और बात पौलुस कहता है कि “एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूलकर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं।”(फिलिप्पियों 3:13-14)

कोई कहेगा, अरे पौलुस ! तुम तो बूढ़े हो गए हो। अरे पौलुस! तुम्हारी नज़र धुंधली हो गई है। अरे पौलुस! तुम्हारी तो शायद कमर झुक गई है। पौलुस! तुम्हारे पैरों में तो रोमी सम्राट ने बेड़ियां डाल दी हैं, तुम तो जेलखाने की कालकोठरी में क़ैद हो, तुम कैसे कह रहे हो कि तुम सब कुछ कर सकते हो। तुम कैसे कह रहे हो कि मैं निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं। परन्तु पौलुस का यहां पर अर्थ है कि वह अनन्त जीवन की ओर, प्रभु यीशु मसीह की ओर, उस मंज़िल की ओर, उस घर की ओर जो प्रभु यीशु ने उसके लिए बनाया है; वह निरन्तर उस ओर आगे बढ़ता जाता है। रोमी सम्राट की कालकोठरी, बेड़ियां और वे सलाखें उसकी दौड़ को रोक नहीं सकतीं। आज से कई वर्ष पूर्व जब भारत में एशियाड हुए तो उसमें भारत की एक धाविका ने भाग लिया। शायद 100 मीटर की दौड़ थी और यह लड़की उस दौड़ पर पहले नम्बर पर पहुंची लेकिन उसे गोल्ड मैडल नहीं मिला बल्कि जो दूसरे स्थान पर रही थी, उसे गोल्ड मैडल मिला। इस लड़की को गोल्ड मैडल क्यों नहीं मिल सका? इस कारण से क्योंकि उसने अपना ट्रैक बदल दिया था, वह अपने दौड़ पथ से अलग हो गई थी। अक्सर हम अपने जीवन में सोचते हैं कि हम बहुत आगे निकल गए हैं और बाकी सब बहुत पीछे छूटते जा रहे हैं। परन्तु जब मंज़िल पर पहुंचते हैं तो पता चलता है कि हम गलत रास्ते पर आ गए हैं। हमने अपना ट्रैक बदल लिया है। दौड़ तो रहे हैं, तेज़ी तो है, दिशा भी है परन्तु ट्रैक ग़लत हो गया है। राह बदल गई है और जब ट्रैक ग़लत हो गया है तो फिर सब कुछ ग़लत हो गया है। हमें यह बात स्मरण रखनी है कि जो तीर होता है, उसका एक उददेश्य होता है। 

4. तीर आवाज़ रहित होता है :- बन्दूक में धमाका होता है, बम में विस्फोट होता है पर तीर में कोई आवाज़ नहीं होती। तीर आवाज़ रहित होता है। कई बार हम सोचते हैं कि अगर हमें परमेश्वर की सेवा करना है तो प्रचारक बनना ज़रूरी है, हमको पास्टर बनना ज़रूरी है। यह बात बहुत प्रमुख होगी अगर हम अपने बच्चों को पास्टर बना सकें, प्रचारक बना सकें। किसी ने कहा है कि परमेश्वर का एक ही पुत्र था और उसने उसको प्रचारक बनाकर भेजा। इन्दु और मेरे विवाह को 24 वर्ष हो गए, हमारे तीन बच्चे हैं। अक्सर मेरी पत्नी से मेरी बात होती थी और हम लोग यह सोचते थे कि बच्चों को क्या बनाना है? किस दिशा में भेजना है। अंत में बहुत अध्ययन के बाद, बहुत सोच-विचार के बाद हमने यह सोचा कि हम जो माता-पिता हैं, हमारा उददेश्य यह है कि हम अपने बच्चों को अच्छा, सच्चा और पक्का मसीही बनाएं। क्योंकि जब बुनियाद मज़बूत होगी तो घर भी मज़बूत होगा। चट्टान पर जब घर बन गया है तो फिर वह डिगेगा नहीं। जो बात है वह यह कि तीर आवाज़ रहित होता है और उसमें कोई आवाज़ नहीं होती। कहने का अर्थ यह है कि हमारी संतानें कोई भी कार्यक्षेत्र चुनें परन्तु हमें उन्हें यह सिखाना है कि अगर वे सच्चे मसीही होंगे तो उनका जीवन ही उनकी गवाही होगी। मेरे एक मित्र शासन में एक ऐसे पद पर हैं जहां अगर वे चाहें तो लाखों रुपये कमा लें। परन्तु जब उनसे परिचित लोग मुझसे मिलते हैं तो कहते हैं कि यह व्यक्ति ऐसा है जो कभी घूस नहीं लेता, इसको मैं 30 साल से देख रहा हूं। ऐसे ही एक बार जब मैं किसी दुकान पर कुछ खरीददारी करने गया हुआ था, अचानक उनकी चर्चा चलने लगी। दुकानदार ने मुझसे कहा कि क्या आप इन व्यक्ति को जानते हैं तो मैंने कहा हां, मैं उन्हें जानता हूं। वह दुकानदार कहने लगा कि सर, वे हमारे यहां से लाखों रुपये का सामान ले जाते हैं पर कभी झूठी रसीद नहीं बनवाते, शायद इसलिए क्योंकि वो क्रिश्चियन हैं, वह बड़े अच्छे व्यक्ति हैं। इन उदाहरणों से जो बात मैं समझाना चाहता हूं वह यह कि हम जहां भी हैं, जिस भी स्थान पर हैं। अपने जीवन के द्वारा, अपने कार्य के द्वारा, अपने व्यवहार, अपने जीवन की खराई के द्वारा, पवित्र आत्मा की अगुवाई के द्वारा हम उसकी गवाही देते रहें। अक्सर लोग जब कोई आत्मिक सभा करते हैं तो बड़े-बड़े बैनर लगते हैं, अखबारों में छपता है कि फलां वक्ता आ रहे हैं, बड़ा हल्ला-गुल्ला होता है। परन्तु अक्सर ऐसे छोटे-छोटे प्रचारक जो मात्र एक बैग लटकाकर एक-एक घर में, झोपड़ियों में, गांवों में जाकर प्रचार करते हैं, उनका प्रचार ज़्यादा प्रभावशाली हो जाता है। मेरे ऑफिस में एक तरफ टाइपराइटर रखा हुआ है और एक तरफ कम्प्यूटर। जब कोई वहां से निकलता है तो उसे पता चल जाता है कि टाइपराइटर पर काम हो रहा है क्योंकि उसकी खट-खट की आवाज़ दूर तक सुनाई देती है। दूसरी तरफ कम्प्यूटर है जिसमें कोई आवाज़ नहीं होती लेकिन टाइपराइटर से कहीं ज़्यादा काम करता है। अक्सर हमारी भी यह आदत हो जाती है कि कोई काम करते हैं तो उसे बढ़ा-चढ़ाकर शोर-शराबे के साथ करते हैं। इसीलिए प्रभु यीशु मसीह कहते हैं - सावधान रहो ! मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो। नहीं तो अपने स्वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। जब तुम्हें प्रार्थना करना है तो अपनी कोठरी में जाओ और खामोशी से अपने पिता के सामने जाकर मांगो और वह तुम्हारी सुनेगा। उपवास करो तो लोगों में ढिंढोरा न पीटो। उपवास ऐसे करो कि किसी को भी पता न चले। जब खामोशी से तुम उपवास करोगे तो तुम्हारा पिता जो स्वर्ग से तुमको देखता है, तुम्हें उसका प्रतिफल देगा। दान दो तो तुरही मत बजवाओ। जब तुम दान दो तो इस प्रकार से कि तुम्हारे दूसरे हाथ को भी पता न चले, तब तुम्हारा स्वर्गीय पिता तुम्हें स्वर्ग में प्रतिफल देगा। हमें अपना काम खामोशी से करते जाना है क्योंकि वह रात आने वाली है जब कोई काम फिर हो नहीं सकेगा। 

5. तीर को सही हाथों में होना चाहिए :- भजन संहिता 127 में लिखा है कि परिवार में जो लड़के हैं वे ऐसे हैं जैसे वीर के हाथ में तीर। वीर के हाथ में तीर यदि रहेगा तब वह सही दिशा में जाएगा। अक्सर लोग ग़लत हाथों में पड़ जाते हैं, ग़लत संगति में चले जाते हैं, ग़लत स्थानों पर चले जाते हैं और तब उनका जीवन बिगड़ जाता है। मेरे एक मित्र हैं जो अमेरिका में रहते हैं और उनका नाम रे मरफी है। वे काफी लम्बे-चौड़े और तगड़े व्यक्ति हैं। अमेरिका में एक समय होता है जब लोगों को लाइसेन्स दिया जाता है कि वे जाकर शिकार करें। एक बार जब मैं पहाड़ों पर बने उनके घर गया तो वह बताने लगे कि साल में दो महीने हम लोग शिकार करते हैं। मैंने उनसे पूछा कि आपके पास कौन सी बन्दूक है तो वे बताने लगे कि बन्दूक तो है लेकिन हम लोग ज़्यादातर शिकार तीर-कमान से करते हैं। यह जानकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी लोग तीर-कमान से शिकार करते हैं। उन्होंने मुझे अपने तीर-कमान दिखाए। जब वे उस तीर को चलाते थे तो वह बिल्कुल सही निशाने पर जाकर लगता था और वह बहुत शिकार कर लेते थे। उन्होंने मुझसे कहा - अजय, तुम भी इसे चलाकर देखो। मैंने कहा - ज़रूर, लाइये मैं भी चलाकर देखता हूं। जब मैंने तीर चलाया तो वह दो-तीन फुट दूर जाकर गिर गया। मैंने कई बार उस तीर को चलाने की कोशिश की और हर बार वह ऐसे ही गिर जाता था। मेरे बच्चे दौड़कर जाते थे कि कौन पहले तीर को उठाकर लाता है। जब मैं उस तीर को चलाता हूं तो वह बच्चों का खेल बन जाता है लेकिन जब वही तीर रे मरफी के हाथों में आता है तो फिर वह सही निशाने पर जाकर अपना उददेश्य पूरा करता है। प्रश्न यह है और जैसा कि वचन में लिखा भी है कि तुम चुन लो कि किसकी सेवा करोगे। बीच के रास्ते में तुम नहीं चल सकते। तुम्हें चुनना पड़ेगा कि तुम किसके हाथ में रहोगे। शैतान या परमेश्वर के। बाइबिल में हम मूसा के विषय में पाते हैं कि वह हकलाता था। एक समय ऐसा आया जब उसने हत्या कर दी और फिर उसे मिस्र से भागना पड़ा। उसके बाद हम पाते हैं कि वह अपने ससुर यित्रो की भेड़ें चरा रहा था, तब परमेश्वर उससे कहता है कि मैं तुझे भेजूंगा कि तू फिरौन के पास जाए और उन 20 लाख इस्राएलियों को जो मिस्र की बंधुवाई में हैं उन्हें लेकर आए। तब वही मूसा, जो कांपता था, जो हकलाता था, जो कह रहा था कि प्रभु तू तो जानता है कि मैं बोलने में भद्दा हूं। वही मूसा जब परमेश्वर के हाथ में आता है और परमेश्वर की सामर्थ्य से भर जाता है, तब वह जाता है और राजा के सामने जाकर ऊंची आवाज़ से कहता है - मेरे लोगों को जाने दे। हम राहाब के विषय में देखते हैं कि जब तक वह शैतान के हाथ में थी तो वेश्या थी, दुष्चरित्र थी। परन्तु यही राहाब जब परमेश्वर के हाथ में आती है तो उसको इतना आदर और गौरव मिलता है कि प्रभु यीशु मसीह की वंशावली में राहाब का नाम आ जाता है। पौलुस यानि शाऊल जब शैतान के हाथों में था तो वह मिटाने वाला था, तोड़ने वाला था। उसके बारे में लिखा हुआ है कि वह मसीहियों के घर जाकर लोगों को घसीट-घसीटकर निकालता था। वह स्तिफनुस की हत्या में भी शामिल था। परन्तु यही शाऊल जब शैतान के हाथ से छूटकर प्रभु यीशु मसीह के हाथ में आता है तो बनाने वाला बन जाता है। वह निकल जाता है और पांच देशों की यात्रा करता है, 17 कलीसियाओं की स्थापना करता है। नया नियम की 27 में से आधी से ज़्यादा पुस्तकें लिखता है और आज तक उसकी लेखनी से असंख्य लोगों के जीवन परिवर्तित हुए हैं, असंख्य लोगों को प्रभु यीशु का उद्धार मिला है। पतरस जब शैतान के बहकावे में आता है तो मसीह को जानने से भी मुकर जाता है लेकिन यही पतरस जब प्रभु यीशु मसीह के हाथों में आता है तो उसके विषय में ट्रेडीशन्स में लिखा गया है कि जब उसको क्रूस पर लटकाकर मार डालने की सज़ा दी गई तो उसने रोमी शासक से कहा कि मुझको क्रूस पर सीधा मत चढ़ाओ, क्योंकि ऐसा तो मेरे स्वामी, मेरे गुरु को चढ़ाया गया था। मैं तो इस योग्य नहीं हूं कि अपने प्रभु के समान क्रूस पर चढ़ाया जाऊं। मुझको उल्टा लटका दो। मेरा सिर नीचे कर दो और पैर ऊपर करके उनमें कीलें ठोंक दो। क्रूस पर चढ़ाकर पतरस की हत्या कर दी गई। पतरस तो चला गया परन्तु आज भी रोम में सेन्ट पीटर्स कैथीड्रल है जो पतरस की निर्भीक गवाही आज भी सारे संसार में दे रहा है। तीर को सही हाथों में होना चाहिए। 

6. तीर भुला दिया जाता है, पर महिमा शिकारी को मिलती है :- हमारी भी यही भावना होना चाहिए कि हमारे जीवन से परमेश्वर को महिमा मिले। हमारे कार्यों से परमेश्वर ऊंचा उठाया जाए। प्रभु यीशु मसीह कहते हैं कि जब मैं ऊंचा उठाया जाऊंगा तो बहुत से लोगों को अपनी ओर खीचूंगा। कई बार हम अपनी बड़ाई चाहते हैं, अपनी प्रशंसा चाहते हैं। परन्तु बात यह है कि सारी महिमा तीर को नहीं वरन शिकारी को मिलती है। कोई यह नहीं कहता है कि इतने बड़े तीर से, जिसमें इतनी धार थी, जिसका इतना नाम था, उससे शिकार किया गया। बल्कि कहा यह जाता है कि उस शिकारी ने शिकार किया। डॉ. बिली ग्राहम ने अपनी लेखनी में लिखा है कि जब मैं मृत्यु को प्राप्त करूं तो मेरे नाम को कभी महिमा मत देना क्योंकि महिमा के योग्य केवल एक है और वह है प्रभु यीशु मसीह, हम सिर्फ़ माध्यम हैं। एक बात जो हमें स्मरण रखना है वह यह कि जो महिमा और आदर हमें मिलता है वह परमेश्वर की ओर से मिलता है। जिसने हमको इस संसार में भेजा। जिसने माता के गर्भ में हमको अदभुत रीति से रचा। जिसने हमको जीवन का श्वास दिया। जिसने मिट्टी से हमको रचा। जिसने हमको आगे बढ़ाया, आशीषित किया। जिसने मृत्यु के बाद संसार के उस पार हमारे लिए स्वर्ग में अनन्त जीवन तैयार किया, अपने हाथों से घर बनाया। जिसने हमसे इतना प्रेम किया कि अपने एकलौते पुत्र को इस संसार में बलिदान होने के लिए भेज दिया। वही परमेश्वर कहता है कि यह तो सम्भव है कि कोई माता अपने जन्माए हुए को भूल जाए परन्तु मैं तुम्हें कभी नहीं भूल सकता। मैंने तुम्हारा चित्र अपनी हथेली पर खोद लिया है। आप किसी का चित्र अगर अपनी हथेली पर खोदेंगे तो खून निकलेगा, दर्द होगा, तकलीफ होगी। विचार कीजिए कि परमेश्वर ने मेरा और आपका चित्र अपनी हथेली पर खोद लिया है और प्रभु यीशु मसीह का रक्त क्रूस पर बहा है। इस संसार में, हो सकता है कि हमें लोग आदर दें, हमें महिमा मिले परन्तु उससे प्रमुख है कि मृत्यु के बाद हमारा क्या होगा? मैं अपनी कलीसिया में कई वर्षों से पासबान हूं और अपनी सेवकाई में मैंने 200 से अधिक फ्यूनरल्स दिए हैं। जब किसी का फ्यूनरल होता है तो लोग जाते हैं, दु:ख मनाते हैं। अगर परिवार के लोगों को छोड़ दिया जाए तो फ्यूनरल में शामिल ज़्यादातर लोग लौटते समय मरने वाले के बारे में बात नहीं करते, बल्कि बात होती है कि आज बाज़ार में फलां चीज़ का भाव बढ़ गया, आज टी.वी. में फलां सीरियल आने वाला है, आज शाम को हमारे बच्चे का फलां प्रोग्राम है, आज के अखबार में यह बात पढ़ने लायक है। अगर इस संसार में हम मनुष्यों से महिमा पाने की चाह रखेंगे तो याद रखिए, हमें मृत्यु के बाद यही मिलने वाला है। भजन संहिता का लिखने वाला दाऊद फूल के विषय में कहता है कि फूल झड़ जाता है और उसकी माटी भी अपने स्थान पर लगे हुए फूल को बिसरा देती है, भूल जाती है। आज जहां हम हैं, वहां कुछ समय तो लोग हमें याद रखेंगे परन्तु फिर बहुत जल्दी भूल जाएंगे। वास्तव में हमें जो आदर मिलता है वह प्रभु यीशु मसीह के द्वारा मिलता है। उस पर विश्वास करने के द्वारा मिलता है। हमको आदर, महिमा, गौरव सब कुछ परमेश्वर देता है। इसलिए हमारी भावना यह होना चाहिए कि सारा आदर और प्रशंसा हमारे जीवनों से परमेश्वर को मिले। तारीफ शिकारी की हो पर तीर को भुला दिया जाए। इसलिए तीर के सम्बन्ध में उपरोक्त 6 बातें हमें सदैव स्मरण रखना हैं। तीर को अगर निशाने पर लगना है तो उसे तेज़ होना चाहिए। यदि तीर को निशाने पर लगना है तो उसे सीधा होना चाहिए। तीर का एक उददेश्य होता है। तीर आवाज़ रहित होता है। तीर को सही हाथों में होना चाहिए। तीर भुला दिया जाता है, पर महिमा शिकारी को मिलती है।

भजन संहिता 77:17-18 में लिखा है - “मेघों से बड़ी वर्षा हुई; आकाश से शब्द हुआ; फिर तेरे तीर इधर उधर चले। बण्वडर में तेरे गरर्जने का शब्द सुन पड़ा था; जगत बिजली से प्रकाशित हुआ; पृथ्वी कांपी और हिल गई।” जब हम उसके तीर बनेंगे और जब ये तीर चलेंगे तो परमेश्वर की गवाही से, प्रभु यीशु मसीह की गवाही से सब तरफ ऐसा प्रकाश होगा कि यह पृथ्वी हिल जाएगी। इसीलिए भजन संहिता का लिखने वाला दाऊद कहता है कि परमेश्वर अपने तीरों को अग्निबाण बनाता है।

हमारे जीवन में ये बातें होंगी तो परमेश्वर हमें, हमारे परिवार और हमारी कलीसिया को आशीषित करेगा और हम बहुतों तक उसके गवाह ठहर सकेंगे। परमेश्वर आपको आशीष दे।

आध्यात्मिक विकास कार्य

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