3. प्रभु यीशु का पृथ्वी पर पुनः आगमन

साप्ताहिक पाठ – उत्पत्ति, अध्याय 7-9; लूका, अध्याय 7-10

दो हज़ार वर्ष पूर्व

यीशु को सलीव की मौत दी गई थी। उसके शिष्य व्याकुल और निराश हो गए थे। उनकी सब आशाएँ उसी पर थी - अब वह कबर में मृतक पड़ा था।

परन्तु तीसरे दिन वह जी उठा। उसके शिष्यों ने अवश्य ही उन शब्दों को याद रखा होगा जिन्हें कि उसने उनसे अपनी मृत्यु के पहले कहा था: ‘तुम रोओगे और विलाप करोगे... तुम्हारा शोक आनन्द में बदक जाएगा।’ (यूहन्ना, अध्याय 16, पद 20)

अपने प्यारे प्रभु और स्वामी को फिर देखने में उन्हें कितना आनन्द हुआ होगा! यूहन्ना हमें बताता है, ‘तब चेले प्रभु को देखकर आनन्दित हुए’ (यूहन्ना, अध्याय 20, पद 20)।

हम उनके आनन्द का अन्दाजा नही लगा सकते हैं।

जब यीशु स्वर्ग चला गया

प्ररितों के काम के पहले अध्याय के प्रथम आठ पदों को फिर से पढ़िये। कल्‍पना कीजिये कि जी उठने के बाद चालीस दिनों तक जब यीशु अपने शिष्यों के बीच में रहा और फिर से उन्हें शिक्षा देते रहा तो वे कितने आनन्दित हुए होंगे।

चालीस दिनों के बाद आप उन्हें और उनके बीच यीशु को बैतनिय्याह की हरी पहाड़ियों पर खड़ा देखते हैं। अचानक वह उनके बीच में से ऊपर स्वर्ग पर उठा लिया गया। कितने अचम्‍भे से वे उस दृश्‍य को निहार रहे होंगे जब उन्‍उसने पृथ्वी को छोड़ा और एक बादल ने उसे उनकी आखों से छिपा लिया। फिर से वह उनसे ले लिया गया। लेकिन इस समय वे न विस्मित हुए और न निराश हुए; बिल्‍कुल भी नही! लूका हमें बताता है, ‘वह उनसे अलग हो गया और स्वर्ग पर उठा लिया गया। तब वे उसको दण्डवत् करके बड़े आनन्द से यरूशलेम को लौट गए।’ (लूका 24:51-52)

उनके आनन्द का भेद

दूसरी बार उनसे अलग होने पर वे इतने आनन्दित क्यों थे? इसलिये कि यीशु ने उनसे एक प्रतिज्ञा की थी। उसने कहा था, ‘देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ।’ (मत्ती, अध्याय 28, पद 20)

अतः वे जानते थे कि कुछ भी हो जाए, वह स्वर्ग से उनकी चौकसी करता रहेगा।

परन्तु सिर्फ इतना ही नहीं। जब वे उसे स्वर्ग में जाते हुए देख रहे थे, दो स्वर्गदूत एक संदेश लेकर उनके पास आए। उन्होंने कहा, ‘हे गलीली पुरूषो, तुम क्‍यों खड़े आकाश की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्‍वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्‍वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।’ (प्रेरितों के काम 1:11)

यह छोटा सा पद इतना महत्‍वपूर्ण है कि इसे हमेशा याद रखना चाहिये। जब शिष्य यरूशलेम को अपने प्रभु की आज्ञाओं का पालन करने हेतू वापस लौटे, तो उन्‍हें पक्‍का विश्‍वास था कि यीशु खुद पृथ्वी पर वापस लौटेगा। इस बात ने उनहें बहुत आनन्दित किया।

यीशु के शब्द

यह सब दो हज़ार वर्ष पूर्व हुआ और यीशु अभी तक वापस नहीं आये है।

परन्तु वह अवश्य आयेंगे। उन्‍होंने स्‍वंय ऐसा कहा। लूका के 21 वें अध्याय और 27 वें पद में व़े स्‍वंय बादल पर सामर्थ और बड़ी महिमा के साथ पृथ्वी पर वापिस आने के विषय में बताते है। (क्‍या आपने ध्यान दिया कि वे बादल में गये? और यह भी कि स्वर्गदूतों ने कहा कि जिस रीति से उन्होंने उसे ऊपर जाते देखा उसी रीति से वह लौटेगा?)

बहुत से दृष्टांत भी यीशु के पुनः आगमन के बारे में बताते हैं। उदाहरण के लिए मत्ती के 25 वें अध्याय और उसके पहले 13 पद में दिए हुए दृष्टांत को लीजिए। इसमें एक दूल्‍हे के बारे में लिखा है, और क्‍योंकि यह एक पूर्वी संस्‍कृति का विवाह का दृश्‍य है तो इसे समझना हमारे लिए मुश्किल नही है। यह दूल्हा वास्‍तव में और कोई नही मसीह है, और यह कहानी हमें चेतावनी देती है कि जब वह आएगा तो कुछ लोग ऐसे भी रहेंगे जो उसके आने के लिए तैयार न होंगे।

तेरवें पद को देखिये। यीशु ऐसा नही कहते है कि, "तुम नही जानते हो कि तुम्हारा प्रभु आएगा या नहीं" उसका आना निश्चित है। इसमें कोई सन्देह नहीं। परन्तु वे यह कहते है, ‘तुम न उस दिन को जानते हो, न उस घड़ी को, जब मनुष्य का पुत्र लौटेगा।’ (मत्ती 25:13)

प्रकाशितवाक्य में यीशु ने अपने अन्तिम सन्देश में कहा, ‘देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ!’ (प्रकाशितवाक्य, अध्याय 22, पद 7)

पतरस की गवाही

यीशु के स्वर्गारोहण के कुछ ही दिनों पश्चात हम पतरस को यरूशलेम में मन्दिर में यहूदियों से, जो कि यीशु को क्रूस पर चढ़ाने में उतरदायी थे, निडरता पूर्वक बातें करते पाते हैं। प्रेरितों के काम, उसके तीसरे अध्याय में वह कहता है, ‘इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएँ, जिससे प्रभु के सम्मुख से विश्श्रान्‍ति के दिन आएँ, और वह यीशु को भेजे जो तुम्हारे लिये पहले ही से मसीह ठहराया गया है।’ (प्रेरितों के काम 3:19-20)

अपनी एक पत्री में जो उसने विश्वासियों को लिखी, पतरस मसीह के दुबारा आने के बारे में कहता है।

 

पतरस की दूसरी पत्री, तीसरे अध्याय के चौथे पद में वह उनके बारे में कहता है जो ठट्ठा करते हुए कहेंगे,

‘उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्योंकि जब से बापदादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है जैसा सृष्टि के आरम्भ से था।’ (2 पतरस 3:4)

शायद आपने लोगों को कुछ ऐसे ही शब्दों का उपयोग करते हुए सुना हो। “ओह बहुत लम्बे समय से वे कहते आ रहे हैं कि यीशु वापस आने वाला है परन्तु वह अभी तक नही आया है;” और कभी यह भी जोड़ देते हैं “वह कभी नही आएगा।”

परन्तु परमेश्वर ने उसे भेजने की प्रतिज्ञा की है और हम जानते हैं कि वह अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करेगा। 9 और 10 पद में पतरस कहता है, ‘प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कुछ लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता कि कोई नश हो, वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिलें। परन्तु प्रभु का दिन चोर के समान आ जाएगा।’ (2 पतरस 3:9-10)

पौलुस की गवाही

यीशु ने स्वंय पौलुस प्रेरित को दर्शन दिया और उसे दूसरों को उपदेश देने के लिये भेजा। पौलुस दावे से कहता है कि जिस सुसमाचार को उसने सुनाया, वह उसे यीशु मसीह द्वारा दिया गया। पौलुस ने प्रभु के पुनः आगमन के बारे में भी सिखाया। प्रेरितों के काम के 17 अध्याय में हम उसे यह कहते हुए पाते हैं,

‘उसने (परमेश्‍वर ने) एक दिन ठहराया है, जिसमें वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है।’ (प्रेरितों के काम 17:31)

पौलुस ने थिस्सलुनीयों की कलीसिया को दो पत्री लिखी। आप इन पत्री को अपनी बाइबिल में पाएँगे – इसमें छोटे आठ अध्याय हैं – और सबसे विचित्र बात यह है कि हर अध्याय में पौलुस यीशु के पुन: आगमन के बारे में चर्चा करता है। थिस्सलुनीकियों के नाम पहली पत्री के चौथे अध्याय और उसके सोलवें पद में पौलुस प्रेरित यीशु के आने पर मृतकों के जी उठने के बारे में कहता है ‘प्रभु आप ही स्‍वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्‍द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूँकी जाएगी; और जो मसीह में मरे हैं, वे पहले जी उठेंगे।’ (1 थिस्सलुनीकियों 4:16)

थिस्सलुनीकियों के नाम दुसरी पत्री के पहले अध्याय और उसके सातवें और आठवें पद में पौलुस कहता है कि कैसे प्रभु यीशु...‘अपने सामर्थी दूतों के साथ, धधकती हुई आग में स्‍वर्ग से प्रगट होगा, और जो परमेश्वर को नहीं पहचानते और हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते उनसे पलटा लेगा।’ (2 थिस्सलुनीकियों 1:7-8)

यहाँ वह बताता है कि यीशु मसीह के आने पर कुछ को दंड देगा। परन्तु यदि हम और आगे पढें तो हमें पता चलता हैं कि उसका आना कुछ के लिए आनन्द का कारण ठहरेगा, क्योंकि वह आएगा ताकि वे सब जो उसमें विश्वास करते हैं उनके द्वारा उसकी प्रंशसा की जाए।

यदि हम दृष्टान्त की कुँवारियों के समान बुद्धिमान हैं तो, हम उसके वचन को पढ़ेंगे और अभी अपने को उसके आगमन के लिये तैयार करेंगे। जब यीशु ने प्रेरित यूहन्ना से कहा, ‘मैं शीघ्र आनेवाला हूँ।’ (प्रका.22:20) यूहन्ना ने उत्तर दिया, ‘आमीन। हे प्रभु यीशु आ!’

क्या हम प्रेरित के समान होंगे और उसके इन शब्दों को अपने हृदय की प्रार्थना बना लेंगे?

सारांश

  1. यीशु मसीह पृथ्वी पर वापस आ रहे है।

  2. इसकी हमें दृढ़ विश्‍वास है क्योंकि उन्‍होंने स्‍वंय इसका आश्वासन दिया।

  3. स्वर्गदूतों ने भी ऐसा ही कहा, पतरस ने भी, पौलुस ने भी और यूहन्ना ने भी यही कहा।

  4. यदि हम बुद्धिमान हैं, तो उसके आने के लिये हम अभी से तैयारी करेंगे।

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१- जीने  की एक नहीं राह 
२- उनसे कहो येशु उन्हें प्यार करता है 
३- क्यों परमेश्वर क्यों